Dohavalies

  
📖 दोहावलियाँ

तकनीकी ज्ञान को लोकभाषा, कविता और दोहों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का यह एक अभिनव प्रयास है यहाँ पर मेरे द्वारा कृषि से सम्बंधित तकनीकों को  चालीसा कवच और दोहावलियां के रूप में प्रस्तुत किया गया है, कृषक इन्हें पढ़कर और चौपालों में गाकर सभी उपायों को आसानी से याद रख सकते हैं और आसानी से उनका उपयोग कर सकते हैं  सभी रचनायें  सरल, सरस, तकनीकी रूप से पुष्ट और स्मरणीय है।

🌟 उद्देश्य

“कठिन तकनीकी विषयों को कविता, दोहा और लोकभाषा के माध्यम से इतना सरल बनाना कि सामान्य नागरिक भी उन्हें समझ सके, याद रख सके और व्यवहार में अपना सके।”

🌱भू रक्षा कवच

किसानों को जुताई, बुआई, सिंचाई एवं कटाई जैसी कृषि प्रक्रियाओं के दौरान अपनाई जाने वाली उन सावधानियों को दोहा एवं चौपाई के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है, जिनसे खेतों में मिट्टी का कटाव रोका जा सके तथा भूमि की उर्वरता सुरक्षित बनी रहे।

📘 भू रक्षा कवच पढ़िए

💧जलग्रहण क्षेत्र चालीसा

किसी भी क्षेत्र  के विकास के लिए प्रमुख पांच तत्वों जन जल जमीन जानवर एवं जंगल यानि "पांच-ज" पर किये जा सकने वाले सभी संभावित कार्यों को  हनुमान चालीसा की तर्ज पर जलग्रहणक्षेत्र चालीसा के रूप में सृजित किया गया है  यह रचना भारत शासन द्वारा प्रसंशित रचना है । इसकी प्रस्तुति अनेकों बार राष्ट्रीय मंचों पर की जा चुकी है 

  📘जलग्रहण क्षेत्र चालीसा पढ़िए  

💧भू जल संग्रह दोहावली

धरती को माता मानते हुए भूजल पुनर्भरण, कुओं एवं ट्यूबवेल रिचार्ज तथा जल संरक्षण की व्यवहारिक तकनीकों को किसानों की चिर परिचित भाषा में प्रस्तुत किया गया है। सामान्य चिकित्सा में अपनाये जाने वाले सभी उपायों को धरती माता के लिए परिवर्तित कर सुगम शैली में दोहों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है इसकी विडिओ प्रदेश के सभी ग्रामों में विभिन्न संगठनों  के द्वारा प्रदर्शित कराई जा चुकी है 

🌾जैविक खेती दोहावली

जैविक खेती की सभी विधियों को किसानों की भाषा में दोहों में पिरोया गया है। इसमें दि गई विधियों से किसान अपने घर में ही जैविक खादें और जैविक कीटनाशक बना सकते हैं  इसकी प्रसंशा में देश एवं प्रदेश के अनेक कृषकों के प्रसंशा पत्र भी प्राप्त हो चुके हैं ।  भूमि स्वास्थ्य और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के वैज्ञानिक उपायों को दोहों के माध्यम से सरल रूप में समझाने वाली रचना।

🧪मिट्टी परीक्षण दोहावली

मिट्टी नमूना लेने की विधि एवं विभिन्न पोषक तत्व का पौधों पर प्रभाव उसका प्रबंधन और संतुलित उर्वरक उपयोग की वैज्ञानिक जानकारी को दोहों के रूप में समझाया गया है। कृषक इसमें बताई गई विधि से मिटटी के सही नमूने ले सकते हैं और उनका परीक्षण कराकर अनुशंसानुसार उर्वरकों का प्रयोग कर सकते हैं 
                                                        🔬 मिट्टी परीक्षण दोहावली पढ़िए
🌳वृक्ष महिमावली

वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन और प्रकृति के प्रति मानवीय दायित्व का काव्यमय संदेश।🌲 प्रेरणा

✍️ ज्ञान जब कविता बन जाता है… तब जन जन में व्याप्त  हो जाता है










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दोहावलियाँ
 प्राकृतिक संसाधनों  के  संरक्षण को सरल एवं आम जन तक की समझ पहुँचाने के दृष्टि कोण से समस्त तकनीकी  पहलुओं  को सरस भाषा में पढ़ने के लिए क्लिक करें




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