Friday, September 4, 2026

AGRICULTURE • WATERSHED • INNOVATION • KNOWLEDGE

Awadhesh Kumar Nema

Experience • Innovation • Public Service • Knowledge

A professional journey devoted to Agriculture, Soil & Water Conservation, Watershed Management, Rural Development, Evaluation and Knowledge Sharing.

Explore the Journey
A glimpse of the knowledge, achievements, innovations and contributions shaped through a lifelong professional journey.
Knowledge & Creativity
Learning, ideas and creative expressions that shaped the journey.
🎓

Academic Journey

A journey of learning, knowledge and continuous academic growth.
💡

Innovations & Ideas

Ideas transformed into practical solutions and meaningful innovations.
📚

Books & Publications

Writings shaped by knowledge, experience and creative expression.
✍️

Dohavalies

Thoughts, experiences and wisdom expressed through meaningful verses.
Achievements & Recognition
Milestones, honours and opportunities earned through professional excellence.
🏆

Professional Excellence

A journey of experience, expertise and meaningful professional contributions.

Professional Recognition

Recognition earned through meaningful work, innovation and contribution.
🇮🇳

National Invitations

Opportunities to share knowledge and ideas on national platforms.
🥇

Awards & Honours

A glimpse of honours received for professional achievements and contributions.
Expertise & Continuing Contribution
Experience put to work through technology, expertise, mentoring and continued service.
💻

Digital Agriculture

Technology, data and digital solutions for smarter and effective agriculture.
🧑‍🔬

State Technical Expertise

Technical expertise and advisory contributions in agriculture and watershed management.
🎯

Training & Mentoring

Sharing knowledge, experience and practical insights with the next generation.
🌱

Beyond Retirement

Continuing the journey through consultancy, evaluation, research and knowledge-sharing.

Explore the Journey

Experience, innovation, public service and knowledge — a journey that continues beyond retirement.

कृषि • जलग्रहण • नवाचार • ज्ञान

अवधेश कुमार नेमा

अनुभव • नवाचार • लोकसेवा • ज्ञान

कृषि, मृदा एवं जल संरक्षण, जलग्रहण प्रबंधन, ग्रामीण विकास, मूल्यांकन एवं ज्ञान प्रसार को समर्पित व्यावसायिक यात्रा।

इस यात्रा को जानिए
ज्ञान, उपलब्धियों, नवाचारों और योगदान की एक संक्षिप्त झलक, जो दीर्घ व्यावसायिक यात्रा से आकार लेती है।
ज्ञान एवं सृजन
ज्ञान, विचार और सृजनात्मक अभिव्यक्तियों से आकार लेती यात्रा।
🎓

शैक्षणिक यात्रा

ज्ञान, सीख और निरंतर शैक्षणिक विकास की प्रेरक यात्रा।
💡

नवाचार एवं विचार

विचारों को व्यावहारिक समाधान और सार्थक नवाचारों में बदलने का प्रयास।
📚

पुस्तकें एवं प्रकाशन

ज्ञान, अनुभव और सृजनात्मक अभिव्यक्ति से उपजी रचनाओं की झलक।
✍️

दोहे एवं दोहावलियाँ

विचार, अनुभव और जीवन-दर्शन की काव्यात्मक अभिव्यक्ति।
उपलब्धियाँ एवं पहचान
पेशेवर उत्कृष्टता से अर्जित उपलब्धियों, सम्मानों और अवसरों की झलक।
🏆

पेशेवर उत्कृष्टता

अनुभव, विशेषज्ञता और सार्थक पेशेवर योगदान की समृद्ध यात्रा।

पेशेवर पहचान

सार्थक कार्य, नवाचार और योगदान से अर्जित पहचान।
🇮🇳

राष्ट्रीय आमंत्रण

राष्ट्रीय मंचों पर ज्ञान, अनुभव और विचार साझा करने के अवसर।
🥇

पुरस्कार एवं सम्मान

उपलब्धियों और योगदान के लिए प्राप्त पुरस्कारों एवं सम्मानों की झलक।
विशेषज्ञता एवं निरंतर योगदान
तकनीक, विशेषज्ञता, मार्गदर्शन और निरंतर सेवा के माध्यम से अनुभव का योगदान।
💻

डिजिटल कृषि

स्मार्ट एवं प्रभावी कृषि के लिए तकनीक, डेटा और डिजिटल समाधानों की पहल।
🧑‍🔬

राज्य तकनीकी विशेषज्ञता

कृषि एवं जलग्रहण प्रबंधन में तकनीकी विशेषज्ञता और परामर्श।
🎯

प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन

ज्ञान, अनुभव और व्यावहारिक समझ को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास।
🌱

सेवानिवृत्ति के बाद भी

परामर्श, मूल्यांकन, शोध और ज्ञान-साझाकरण के माध्यम से निरंतर योगदान।

इस यात्रा को जानिए

अनुभव, नवाचार, लोकसेवा और ज्ञान — एक ऐसी यात्रा जो सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी है।

Saturday, January 3, 2026

🔴मेरे बारे में और अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें : MY PROFILE GALLERY🔴 

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Received  Professor Rattan Lal Awards for Excellence in Regenerative Agriculture as "Regenerative Agri Innovator" on the occasion of World Soil Day 2025 








Thursday, October 30, 2025

🔴मेरे बारे में और अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें : MY PROFILE GALLERY🔴

360 Degree Management : New Book


My New Book Launch....

360 Degree Management

The Core Fundas for Mastering People, Purpose and Process in Every Direction

This book is a compendium of practical Mantras or techniques essential for Any Manager or any Executive Officers to effectively handle responsibilities in any Institution. It offers a 360-degree approach to managing key stakeholders—field and office staff, higher officials, board members, beneficiaries, media, and public representatives—crucial to achieving organizational goals.

Book also includes an innovative Ten Directional Vastu of stackholders to give a managing vision for managers.

Rooted in my 40 years of experience in the public sector, these techniques are drawn from real-life practice and personal insights. Each Mantra reflects a core funda of effective management and is applicable across sectors. This book is highly useful for heads of offices—such as Sub Divisional Officers, Executive Engineers, District and Divisional Officers, Deputy and Joint Directors, Superintending Engineers, Directors, and Managing Directors—and aims to carve a place in the field of practical, experience-based management.

Book is available at ...

https://store.pothi.com/book/awadhesh-kumar-nema-360-degree-management/







Thursday, April 3, 2025

'लक्ष्य प्राप्ति के सूत्र' 

श्री रामचरितमानस में वर्णित माता सीता की खोज यात्रा के विभिन्न प्रसंगों के विश्लेषण परआधारित 108 सूत्रों से युक्त मेरी एक और पुस्तक 'लक्ष्य प्राप्ति के सूत्र'  यह भी पोथी पब्लिकेशन से प्रकाशित हुई है


इस 
पुस्तक की समीक्षा जाने माने समीक्षक श्री शिव कुमार शर्मा जी द्वारा की गई है  उनके शब्दों में ..........

मानस के प्रसंगों पर आधारित जीवनोपयोगी प्रबंधन का खाका है पुस्तक  : 'लक्ष्य प्राप्ति के सूत्र'

            श्री रामचरितमानस में वर्णित माता सीता की खोज यात्रा के विभिन्न प्रसंगों के विश्लेषण परआधारित 108 सूत्रों से युक्त अवधेश कुमार नेमा द्वारा लिखित पुस्तक 'लक्ष्य प्राप्ति के सूत्र' हमें अपने जीवन प्रबंधन के व्यवहारिक पक्ष का ज्ञान कराती है। वर्ष 2025 के आरंभ में प्रकाशित इस पुस्तक में महत्त्वपूर्ण जीवनोपयोगी सूत्रों को सरल शैली में समझाया गया है यथा ज्ञान का उपयोग समाज कल्याण हेतु करें,सद्विचार लक्ष्य प्राप्ति में सहायक और अभिमान बाधक है,मित्र की भावनाओं के मूल भाव को समझना जीवन को सुगम करता है,अवसर को पहचान कर उसका लाभ उठाना ही बुद्धिमत्ता है,कार्य करने के लिए अच्छी योजनाएं बनाना, कार्यों की समय सीमा का निर्धारण आदि।कतिपय प्रसंग-सूत्र दृष्टव्य हैं।

एहि विधि सकल कथा समुझाई।लिए दुऔ जन पीठि चढ़ाई।।

             सुग्रीव जी के आदेश पर हनुमान जी बिप्र वेश धारण कर  श्री राम लक्ष्मण जी से मिले। संपूर्ण जानकारी लेने के पश्चात सुग्रीव जी से उनकी मित्रता करने हेतु पर्वत पर ले जाने के लिए अपनी पीठ पर चढ़ा लिया। उनके इस कार्य से सुग्रीव को भी नीचे उतरकर नहीं आना पड़ा और । श्री राम लक्ष्मण जी को भी सम्मानपूर्वक पर्वत पर अवतरित करा दिया। अंजनी लाल द्वारा इस प्रकार उभय पक्ष की मर्यादा रखकर सेवक धर्म का निर्वहन किया। शास्त्र की मर्यादा भी रक्षित हुई। किसी को पीठ पर  बिठाकर ले जाना दोनों पक्षों में परस्पर भरोसे एवं विश्वास की दृढ़ता का परिचायक है। हनुमान जी भगवान श्री राम को पीठ पर बिठाकर निश्चित हो गए। एक दूसरे पर भरोसा करने पर दोनों पक्षों की चिन्ता मिट जाती है। उन्होंने इसीलिए पीठ पर बिठाया की जिस भगवान स्वयं ही हनुमान जी को पकड़ लें अर्थात मनुष्य को भगवान को पकड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए केवल विश्वास रूपी हनुमान का सहारा लेना चाहिए भगवान के प्रति विश्वास आने पर भगवान स्वयं मनुष्य को पकड़ लेते हैं। 

            एक महत्वपूर्ण आशय यह भी स्पष्ट होता है कि हृदय धर्म का परिचायक है और पीठ धर्म की। हनुमान जी के हृदय में तो राम पहले से ही थे पर पीठ पर नहीं थे इसलिए राम को पीठ पर बिठाया जिससे आगे पीछे दोनों जगह राम स्थापित हो गए। यह हनुमान जी की समग्रता का परिचायक है । इस सूत्र को इस प्रकार भी देख सकते हैं जीवन में हमें जो ज्ञान मिला है वह हमारे हृदय या मन में तो है किंतु उसे समाज के हित में उपयोग नहीं किया,ऐसा ज्ञान अर्थहीन है अतः ज्ञान की उपयोगिता तभी है जब वह किसी लोक कल्याण के काम में आए समाज के लिए उपयोगी हो। ज्ञानार्जन की प्रक्रिया उभयमुखी है अर्थात अंतर्मुखी और बहिर्मुखी।अतएव अर्जित ज्ञान का लोक हित में उपयोग होने पर ही ज्ञान की पूर्णता है। उक्त प्रसंग सफलता के अनेक सूत्र समेटे हुए हैं यथा शास्त्र सम्मत सुसंगत नियमों का पालन करना ,वरिष्ठों की मर्यादा का ध्यान रखना उन पर भरोसा रखना और उन पर विश्वास कर निश्चिंत रहना, ज्ञान का उपयोग समाज कल्याण में करना निसंदेह सफलता दिलाता है।अहंकार लक्ष्य प्राप्ति में बाधक होता है वानरराज बालि का अभिमान उन्हें ले डूबा।(अस कहि चला महा अभिमानी।तृण समान सुग्रीवहिं जानी ।। मूढ तोहि अतिसयअभिमाना। नारि सिखावन करसि न काना।।)

            कार्य की सफलता के लिए सुविचारित योजनाएं बनाना आवश्यक है।सीता जी की खोज में सुग्रीव ने वनचरों के अलग-अलग दल बनाकर विभिन्न दिशाओं में भेजे थे तथा सभी को 15 दिवस का समय दिया था। (अब मारुत सुत दूत समूहा।पटवहु जंह तंह वानर जूहा।।कहहु पाख में आव न जोई।मोरे कर ताकर बध होई।।)

            श्री रामचरितमानस की प्रसंगों का आध्यात्मिक अर्थों के साथ-साथ जीवन में लक्ष्य प्राप्ति के 108 सूत्रों को पिरोए हुए सर्वोपयोगी 144 पृष्ठों की पुस्तक को निसंदेह सूत्रमाला ही नहीं अपितु सूत्रशाला कहना समीचीन होगा।

इस क्यू आर कोड से पुस्तक प्राप्त की जा सकती है